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Showing posts from May, 2017

दर्द की इन्तहा

दर्द की इन्तहा हुई फिर से । लो तेरी याद आ गयी फिर से ।। फिर कहाँ चढ़ रहा है रंग-ए-हिना । कहाँ बिजली सी गिर गयी फिर से ।। बंदिशें तोड़ के, ठुकरा के लौट आया है । दिल को ग़फ़लत सी हो गयी फिर से ।। वही ख़ुशबू जो बस गयी है मेरे सीने में । अश्क़ बनकर छलक उठी फिर से ।। 'पंकज'