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व्यंग्य - कसम पूरब वाले बाबाजी की

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गुरू आप भी अच्छा मज़ाक कर लेते हो। मौज लेने का कोई मौका जाने नहीं देते। कसम पूरब वाले बाबाजी की... सच्ची बता रहे हैं; मज़ा आ गया! एक तो आपका इत्ता बड़ा लाव-लश्कर, बड़ी-बड़ी गाड़ियाँ, असलहा लहराते हुए सुरक्षाकर्मियों की फौज और तिस पर आपका एकदम टनाटन रौबीला अंदाज...लालू के लालटेन की कसम स्कूल वालों की तो बत्ती ही गुल हो गयी थी। और तो और गुरू आप देखे नहीं, मास्टर कैसे काँप रहे थे? जैसे माइनस 36 डिग्री में एबीपी न्यूज वाले रिपोर्टिंग कर रहे हों। हमें तो बड़ी जोर की हँसी छूट रही थी। बस बाबा रामदेव के प्राणायाम का बहाना बनाये खड़े रहे किसी तरह। और बेचारे बच्चों की हालत तो असम वाले लेनिन की मूरत सी हो गयी थी। अच्छा एक बात बताओ गुरू- ये इत्ता सालिड हड़कियाने की तकनीक सीखे कहाँ से हो? वाह भई वाह! अच्छा तरीका है आपका। जब मज़े लेने का मन हो तो घुमा दो काफिला किसी सरकारी स्कूल की तरफ। किसी ऐसे मास्टर को पकड़ो जो शकल से ही अडवाणी की कुंठा जैसा दिखता हो। छूटते ही दो चार सवाल दाग दो। बेचारा सीधा-सादा आदमी हड़बड़ाकर यूँ ही चित्त हो जाएगा। बड़ा फायदा यह कि अगले दिन अखबार में...