"ग़ालिब तेरे क़लाम में क्योंकर मज़ा न हो, पीता हूँ रोज़ धोकर शीरीं सुखन के पाँव।" ग़ज़लों ghazal की दुनिया की बात करें तो मिर्ज़ा ग़ालिब ghalib के जैसा शायर अब शायद दुबारा नहीं होगा। उनकी शख्शियत, ज़िन्दगी के हर पहलू पर उनका नज़रिया, उनका अंदाजे बयाँ, उनकी कलम और उनका क़लाम उन्हें बेजोड़ बनाता है। यूँ तो ग़ालिब साहब मूलतः फ़ारसी के शायर हैं फिर भी उन्होंने उर्दू में जितना लिखा है, उर्दू अदब के बाक़ी सारे क़लमकारों को मिला देने से भी उसकी बराबरी न हो सकेगी। मिर्ज़ा ग़ालिब की प्रसिद्धि का आलम यह है कि बड़े-बुज़ुर्ग तो छोडिए नए लड़के भी अक्सर बोलते रहते हैं - "हमारी शख्शियत का अंदाज़ा तुम क्या लगाओगे 'गालिब'.. । आप ज़िन्दगी के किसी भी मोड़ पे हों ग़ालिब की शायरी ghalib shayari आपके साथ खड़ी मिलेगी। मोहब्बत, बेवफाई, रुसवाई पर तो उन्होंने खूब लिखा ही है, ज़िन्दगी से लेकर जन्नत तक के बाक़ी मौज़ूआत पर भी उन्होंने भरपूर लिखा है और बहुत ख़ूब लिखा है। आज इस बेहद मशहूर, हर दिल अजीज़ शायर जनाब मिर्ज़ा ग़ालिब का जन्मदिन है। आइए इस मौक़े पर पढ़ते हैं उनके कुछ चुनिन्दा, बेहतरीन शेर ghalib sher जो मुझे...
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