Posts

Showing posts from May, 2017

दर्द की इन्तहा

Image
दर्द की इन्तहा हुई फिर से।
लो तेरी याद आ गयी फिर से।।

फिर कहाँ चढ़ रहा है रंग-ए-हिना, कहाँ बिजली सी गिर गयी फिर से।।

बंदिशें तोड़ के, ठुकरा के लौट आया है, दिल को ग़फ़लत सी हो गयी फिर से।।

वही ख़ुशबू जो बस गयी है मेरे सीने में, अश्क़ बनकर छलक उठी फिर से।।
बाल कृष्ण द्विवेदी 'पंकज'
सम्पर्क-९६५१२९३९८३

Popular posts from this blog

हिंदी भाषा की विशेषताएँ

चार वेद, छ: शास्त्र, अठारह पुराण