अनुभूति


ऐ मेरे दोस्त
मैं अब तक नहीं समझ पाया
कि तेरे आने में
दिल-दिमाग़ पे छा जाने में
बात क्या है
तुम्हारे आके चले जाने में
तुम आए तो दिल ने आहिस्ता ये पूछा था
अब तुझे आने की ज़रूरत क्या थी
जो मेरी रूह तलक दर्द सा समाया हो
उसे और करीब आने की ज़रूरत क्या थी
और अब एक बार फिर
जब तुम जा रहे हो
धडकनें एक मासूम सा सवाल करती हैं
क्या जाना जरुरी है?
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