हिंदी भाषा, साहित्य, गीत, गजल, शायरी व विविध उपयोगी सामग्री हिंदी में

नवीनतम

Post Top Ad

Your Ad Spot

Saturday, November 25

मेरा प्यार भी अजीब था || Ye jo ishq hai



ये जो इश्क है वो जूनून है, वो जो न मिला वो नसीब था।
वो पास हो के भी दूर था, या दूर हो के करीब था ।।

मेरे हौसले का मुरीद बन या दे मुझे तू अब सजा।
तू ही दर्श था तू ही ख्वाब था, तू ही तो मेरा हबीब था।।

उस शहर की है ये दास्ताँ, जहाँ बस हमी थे दरमियाँ।
न थी दुआ, न थी मेहर, न तो दोस्त था न रकीब था।।

करता रहा दिल को फ़ना, जिसे लोग कहते थे गुनाह।
एक अजनबी पे था आशना, मेरा प्यार भी अजीब था।।

'अज्ञात'

Post Top Ad

Your Ad Spot

Pages