सुमधुर भावों की सुंदर प्रेम कविता love poem - लौट आओ

प्रियतम ने वादा किया था लेकिन वक्त पर भूल गया। ऐसा अक्सर हो जाता है। ऐसे में प्रेमिका का रूठना स्वाभाविक है। वह रूठ कर चली जाती है। फिर शुरू होता है मान-मनुहार का सिलसिला। प्रेमिका (पत्नी) को मनाने और उसे लौट आने की मिन्नतें करते-करते प्रियतम (पति) ने क्या-क्या कह दिया, क्या-क्या याद दिला दिया और कौन-कौन सी कसमें दे दीं! आनंद लें इन सुमधुर भावों का इस छोटी सी प्रेम कविता (love poem) में।

love poem in hindi

कवि सोम ठाकुर की प्रेम कविता | Love Poem - लौट आओ


लौट आओ, माँग के सिंदूर की सौगंध तुमको,

नयन का सावन निमंत्रण दे रहा है।

लौट आओ, आज पहले प्यार की सौगंध तुमको,

प्रीत का बचपन निमंत्रण दे रहा है।

लौट आओ मानिनी, है मान की सौगंध तुमको,

बात का निर्धन निमंत्रण दे रहा है।

लौट आओ, हारती मनुहार की सौगंध तुमको,

भीगता सावन निमंत्रण दे रहा है।